भगवान विष्णु के प्रथम अवतार ( मत्स्य ) अवतार पौराणिक कथा
विष्णु पुराण के अनुसार, मत्स्य रूप में ही भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए प्रथम अवतार धारण किया था। यह अनोखा और अद्भुत संयोग है कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन यानी प्रतिपदा तिथि से सृष्टि का आरंभ हुआ माना जाता है तो दूसरे दिन भगवान विष्णु के प्रथम अवतार का प्राकट्य हुआ माना जाता है।
मत्स्य रूप में करते हैं निवास
मत्स्य भगवान के बारे में पुराणों में बताया गया है कि कार्तिक मास में भगवान विष्णु जल में मत्स्य रूप में निवास करते हैं। यही वजह है कि बहुत से श्रद्धालु कार्तिक मास में मछली खाना बंद कर देते हैं। भगवान मत्स्य के प्रति आभार और श्रद्धा प्रकट करने के लिए श्रद्धालुजन चैत्र शुक्ल द्वितीया तिथि को मत्स्य जयंती मनाते हैं।
मत्स्य अवतार की कथा
मान्यता है कि प्रलय से पूर्व सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु एक छोटी मछली का रूप धारण करके सत्यव्रत मनु के पास आ गए। मनु भगवान विष्णु के परम भक्त थे। जब मनु सूर्य देव को अर्घ्य दे रहे थे तो मछली उनकी अंजुली में आ गई और बोली कि आप अपने कमंडल में मुझे रख लीजिए ताकि मेरी रक्षा हो सके। मनु ने मछली पर दया करके उसे कमंडल में रख लिया और रात भर में ही मछली इतनी बड़ी हो गई कि कमंडल उसके लिए छोटी हो गई।
मछली ने वास्तविक स्वरूप प्रकट किया
मनु ने घर के बाहर मछली के लिए एक गड्ढा बना दिया लेकिन अगले दिन मछली का आकार और बड़ा हो गया। मछली ने कहा कि मनु महाराज आप मुझे अब सागर में छोड़ दीजिए। मछली को सागर में छोड़ दिया गया तो अगले दिन मछली का आकार इतना बड़ा हो गया कि सागर को ही ढ़क लिया। इसके बाद मछली ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और मनु से कहा कि आज से सातवें दिन जल प्रलय आएगा। आप सृष्टि की रक्षा के लिए तमाम चीजों को एक नौका में रख लीजिए इस नौका को मैं प्रलय तक संभालकर रखूंगा। जल प्रलय के दौरान भगवान विष्णु ने अपने मत्स्य रूप में मनु सहित सप्तऋषियों और सभी जीवों के जोड़े और बीजों को सुरक्षा प्रदान किया और सृष्टि का फिर से निर्माण हो पाया।
इस तरह किया सृष्टि का निर्माण
जल प्रलय के बाद सृष्टि में जब जल ही जल था तब ठोस भूमि की स्थापना के लिए भगवान मत्स्य सागर के तल में जाकर मिट्टी लाए। इस मिट्टी को जल में मिलाकर जैसे दूध से दही बनाते हैं उसी प्रकार से जल से ठोस भूमि का निर्माण किया गया। और इस तरह सृष्टि के फिर से निर्माण हो सका। इसलिए सृष्टि के निर्माता और रक्षक मत्स्य भगवान को मत्स्य जयंती पर श्रद्धालुजन विशेष रूप से स्मरण करते हैं और पूजते हैं।